17
December
हम अपने शरीर के दर्द, बुखार या चोट के बारे में बिना झिझक बात कर लेते हैं। लेकिन जैसे ही बात दिमाग और मन की सेहत की आती है, हम चुप हो जाते हैं।
“लोग क्या कहेंगे?”
“कमज़ोर समझेंगे”
“अपने आप ठीक हो जाएगा”
ऐसी सोच और डर मानसिक रोग जैसे depression, anxiety disorder इत्यादि पर खुलकर बात करने से रोकते हैं। हकीकत यह है कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही ज़रूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। जब इस पर बात नहीं होती, तो समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और ज़िंदगी के हर हिस्से को प्रभावित करने लगती है।
मानसिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ बीमारी न होना नहीं है। यह इस बात से जुड़ा है कि—
जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ होता है, तो वह—
भारत में आज भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई गलत धारणाएँ मौजूद हैं:
इन धारणाओं की वजह से लोग—
चुप्पी इलाज नहीं है। कई बार यह समस्या को और गहरा कर देती है।
कई लोग यह समझ ही नहीं पाते कि वे मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं।
अगर ये लक्षण 2 हफ्ते से ज़्यादा समय तक बने रहें, तो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
जब व्यक्ति खुलकर बात करता है, तो समस्या जल्दी पहचानी जाती है और इलाज आसान हो जाता है।
जितनी ज़्यादा बातचीत होगी, उतना ही stigma (कलंक) कम होगा।
परिवार और दोस्त जब समझते हैं कि व्यक्ति किस दौर से गुजर रहा है, तो सपोर्ट बेहतर मिलता है।
समय पर बात और सही मदद कई मामलों में जान भी बचा सकती है।
जब परेशानियाँ रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगें, नींद, काम, रिश्ते या आत्मविश्वास बिगड़ने लगे, तो यह संकेत होता है कि पेशेवर मदद की ज़रूरत है। यहीं पर सही मार्गदर्शन और अनुभव वाले psychiatrist in lucknow से मिलना फर्क पैदा कर सकता है।
(नाम बदला गया है, पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है)
अमित, 32 वर्ष, एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। वे पहली बार क्लिनिक आए तो उनकी शिकायत बहुत सीधी थी— “नींद ठीक नहीं रहती, मन हर समय बेचैन रहता है।”
बातचीत में धीरे-धीरे सामने आया कि पिछले कई महीनों से वे—
घरवालों को यह सब “काम का तनाव” लगता रहा। अमित ने भी किसी से खुलकर बात नहीं की, क्योंकि उन्हें डर था कि लोग उन्हें कमज़ोर समझेंगे।
एक दिन ऑफिस मीटिंग के दौरान उन्हें तेज़ घबराहट, पसीना और सांस फूलने की समस्या हुई। यहीं से परिवार को समझ आया कि बात सिर्फ तनाव की नहीं है।
अमित आज कहते हैं: “मुझे लगा था ये सब अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन, Dr Saurabh Jaiswal से बात करने से ही असली बदलाव शुरू हुआ।”
अगर आप या आपके आसपास कोई— लंबे समय से परेशान है, रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है, खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं
तो इंतज़ार न करें। समय पर मानसिक रोग विशेषज्ञ (mental health doctor in lucknow) से सही इलाज और मार्गदर्शन ज़िंदगी को फिर से संतुलन में ला सकता है।
कुछ हल्की समस्याएँ समय के साथ ठीक हो सकती हैं, लेकिन अगर लक्षण लंबे समय तक रहें, तो पेशेवर मानसिक रोग विशेषज्ञ से मदद ज़रूरी होती है।
हर मामले में नहीं। इलाज व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है—कभी काउंसलिंग, कभी दवा, और कभी दोनों।
यह समस्या की गंभीरता और इलाज पर निर्भर करता है। सही इलाज से अधिकांश लोग बेहतर जीवन जी सकते हैं।
हाँ, परिवार का सहयोग रिकवरी में बहुत अहम भूमिका निभाता है।
जब लोग अपने अनुभव साझा करते हैं, तो दूसरों को समझ आता है कि वे अकेले नहीं हैं।